12/08/2007

कुछ खबरें फटाफट...




तीन-चार खबरें जल्‍दी-जल्‍दी बतानी हैं, क्‍योंकि एक तो ब्‍लॉग अपडेट करने का वक्‍त नहीं मिलता, दूसरे हरेक खबर के बारे में लंबा नहीं लिखा जा सकता...


सबसे पहले...जल्‍द से जल्‍द सिनेमाहाल जाएं और नई फिल्‍म देखें 'दस कहानियां'। मैंने कल देखी और इसीलिए कह रहा हूं...प्रयोगधर्मी संवेदनशील लोगों के लिए अच्‍छी फिल्‍म है...।



  • पिछले दिनों मुझे एक अनचाही कॉल आई एक नामी-गिरामी खबरिया चैनल से...मैंने कभी आवेदन नहीं किया था इसलिए चौंका...घर के बगल में होने के नाते सोचा एक बार हो आएं...हालांकि पिछले अनुभव इसकी इजाज़त नहीं दे रहे थे। मैं गया...और मैं लौट आया। इसके बीच मेरे साथ जो कुछ भी हुआ उसे आप मेरी बेवकूफी कहें...मज़ाक कहें...या टीवी वालों की सनक कहें...बात एक ही है। एक बार फिर विश्‍वास पुष्‍ट हुआ कि टीवी चैनलों में काम करना मेरे लिए अब भी संभव नहीं हुआ है। मैं इस पर एक लंबी कहानी लिख रहा हूं...एक साहित्यिक पत्रिका का मीडिया विशेषांक आने वाला है उसी के लिए...ठहर जाएं और सब्र करें...बहुत मज़ा आएगा।



  • जो सज्‍जन...ज़ाहिर तौर पर पत्रकार ही...वैकल्‍ि‍पक मीडिया की कार्यशालाओं में दिलचस्‍पी रखते हैं वे निम्‍न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं... http://www.safarr.blogspot.com/



  • बाज़ार में 'शुक्रवार' के नाम से एक नई पत्रिका आ रही है...जो सज्‍जन दिलचस्‍पी रखते हैं वे खोज-खबर ले सकते हैं।



  • चरखा विकास संवाद में संपादक की कुर्सी मेरे आने के बाद सवा साल के भीतर तीसरी बार खाली हो गई है...इच्‍छुक संपर्क करें तेज़ी से।



  • साम्राज्‍यवाद विरोधी लेखक मंच की बैठक जो प्रत्‍येक रविवार जयप्रकाश नारायण पार्क में शाम 5.00 बजे होती थी, उसमें अब ठंड के कारण कुछ तब्‍दीली की गई है...नया स्‍थान है श्रीराम सेंटर, मंडी हाउस और समय है दिन में 3.00 बजे। दिन वही, रविवार।



  • पत्रकारों के लिए एक ज़रूरी पुस्‍तक 'रिलायंस : द रियल नटवर' मानस प्रकाशन से आई है...कहीं से जुगाड़ कर जरूर पढ़ें...क्‍या जाने रिलायंस पर पिछली पुस्‍तक 'पॉलिस्‍टर प्रिंस' की तरह कहीं इसे भी बाज़ार से गायब न करवा दिया जाए।

प्रकाशित सामग्री से अपडेट रहने के लिए अपना ई-मेल यहां डालें