12/25/2014

चुनावी नतीजे और संघ का एजेंडा



अभिषेक श्रीवास्तव


‘‘कश्मीर के महाराजा क्षत्रियों के सूर्यवंश से आते हैं, जो राजपूतों का सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित वंश है। यही वह वंश था जिसने इस विश्व को रामायण का महान नायक मर्यादा पुरुषोत्तम राम दिया। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि विशेषकर हिंदुस्तान के राजपूत प्रांत और अपने शौर्य के लिए प्रसिद्ध विशाल राजपूत जनता इस मौके पर कश्मीर की रक्षा के लिए खड़ी होगी और कश्मीर से लुटेरों को मार भगाने के लिए भारत की सरकार को हरसंभव मदद देगी।’’

(सत्यानंद शास्त्री, ‘‘इम्पाॅर्टेन्स आॅफ कश्मीर’’, 6 नवंबर 1947, आॅर्गनाइज़र, पुनर्प्रकाशित 9 नवंबर, 2014)


12/20/2014

भूलने के पक्ष में



अभिषेक श्रीवास्‍तव 



दुनिया जीने के लायक नहीं बची
याद नहीं कितनी बार कही होगी हमने यह बात
और फिर जीते चले गए होंगे
ठीक उसी तरह
जैसे लिखी जा रही है आज यह कविता
कई बार लिख चुकने के बावजूद
कि कविता करने का वक्‍त अब नहीं रहा

12/13/2014

रायपुर के सैलानियों, विष्‍णु खरे का पत्र पढ़ो और डूब मरो!


(करीब चार दर्जन लाशों पर खड़े होकर छत्‍तीसगढ़ की भाजपा सरकार साहित्‍य का महोत्‍सव मना रही है और हमेशा की तरह हिंदी साहित्‍य और पत्रकारिता के कुछ चेहरे न सिर्फ लोकतांत्रिकता का दम भरते हुए वहां मौजूद हैं, बल्कि अशोक वाजपेयी की मानें तो वे वहां इसलिए मौजूद हैं क्‍योंकि ''साहित्‍य राजनीति का स्‍थायी प्रतिपक्ष है'' (नई दुनिया)। खुद को ''प्रतिपक्ष'' और ''प्रगतिशील'' ठहराते हुए एक हत्‍यारी सरकार के मेले में शिरकत करने की हिंदी लेखकों की आखिर क्‍या मजबूरी हो सकती है, जबकि उनकी नाक के ठीक नीचे खुद को लेखक कहने वाला राज्‍य का भूतपूर्व प्रमुख दरोगा यह बयान तक दे देता है सबसे बड़ा समझदार अकेला वही है? ठीक वही कारण जिन्‍हें नज़रंदाज़ कर के बाकी लेखक रायपुर में मौजूद हैं, उन्‍हें गिनवाते हुए वरिष्‍ठ कवि विष्‍णु खरे इस आयोजन में बुलावे के बावजूद नहीं गए हैं। पत्रकार आवेश तिवारी ने विष्‍णु खरे की सरकार को लिखी चिट्ठी अपने फेसबुक की दीवार पर सरकारी सूत्रों के हवाले से साझा की है। नपुंसकता और पस्‍तहिम्‍मती के इस दौर में यह चिट्ठी हम सब के लिए एक आईने की तरह हैं। नीचे हम आवेश तिवारी के लिखे इंट्रो के साथ पूरी चिट्ठी छाप रहे हैं - मॉडरेटर)  


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