5/13/2015

विकास की बलिवेदी पर: आखिरी किस्‍त

अर्धकुक्‍कुटीय न्‍याय की चौखट 

इस कहानी को और लंबा होना था। कनहर की कहानी के भीतर कई ऐसी परतें हैं जिन्‍हें खोला जाना था। ऐसा लगता है कि उसका वक्‍त अचानक खत्‍म हो गया। यह भी कह सकते हैं कि उसका वक्‍त अभी कायदे से आया नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि बीते गुरुवार यानी 7 मई को राष्‍ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कनहर पर अपना वह बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया जिसके बारे में सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक शिवशंकर यादव का 20 अप्रैल को दिया गया एक दिलचस्‍प बयान था, ''इन लोगों को पता था कि कनहर का फैसला इनके खिलाफ़ आने वाला है, इसीलिए ये लोग सब्र नहीं कर पाए और ऑर्डर रिजर्व होते ही ग्रामीणों को भड़का दिए।''

5/06/2015

विकास की बलिवेदी पर: तीसरी किस्‍त

अकलू को 1 मई को अस्‍पताल से छुट्टी मिल गयी 
14 अप्रैल की गोलीबारी में घायल अकलू को 1 मई को बीएचयू के अस्‍पताल से छोड़ा गया। उस दिन बताते हैं कि अस्‍पताल में एक सिपाही अकलू के पास कुछ पैसे लेकर आया था। एक वामपंथी छात्र संगठन के कुछ कार्यकर्ता जो अकलू की देखरेख में थे, उनका कहना है कि बांध की ठेकेदार एचईएस कंपनी ने बीस हज़ार रुपये अकलू को भिजवाये थे और हिदायत दी थी कि अस्‍पताल से निकलने के बाद वह दोबारा आंदोलन में नहीं जुड़ेगा। उसी दिन यह भी आशंका ज़ाहिर की गयी कि कहीं अस्‍पताल से निकलने के बाद अकलू को गिरफ्तार न कर लिया जाए। इस आशय का एक ईमेल एलर्ट अखिल भारतीय वन श्रमजीवी यूनियन की ओर से प्रसारित किया गया था जिसमें अकलू को गिरफ्तारी से बचाने के लिए डीएम, एसपी, मुख्‍य सचिव, गृह सचिव, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग आदि को फोन करने की अपील की गयी थी। आखिरकार अकलू को गिरफ्तार नहीं किया गया। 

5/01/2015

विकास की बलिवेदी पर: पहली किस्‍त

आंबेडकर जयन्‍ती पर चली गोली से घायल अकलू चेरो, ग्राम सुन्‍दरी, सोनभद्र 


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