6/29/2015

इमरजेंसी का स्‍मरण और गांधी के बाएं बाजू बंधा बैनर



अभिषेक श्रीवास्‍तव



''आपातकाल की चालीसवीं बरसी पर रिहाई मंच ने दिया धरना... जलाकर मारे गए शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह को इंसाफ दिलाने और प्रदेश में दलितों, महिलाओं, आरटीआइ कार्यकर्ताओं व पत्रकारों पर हो रहे हमले के खिलाफ शासन को सौंपा 17 सूत्रीय ज्ञापन।''



6/25/2015

प्रफुल भाई, इन्‍हें माफ़ करना... ये खुद अपने दुश्‍मन हैं !



अभिषेक श्रीवास्‍तव 


प्रफुल बिदवई: 1949 - 23 जून, 2015 

6/17/2015

शाहजहांपुर, जून और विश्‍वासघात: 157 बरस पहले का एक पन्‍ना


पहली जंग-ए-आज़ादी के महानायक डंका शाह की भुला दी गयी शहादत


शाह आलम 
शाह आलम इतिहास की कब्र को खोदकर आज़ादी के वीर सपूतों की रूहों को आज़ाद कराने के काम में बरसों से जुटे हैं। इस बार उन्‍होंने 1857 की पहली जंग-ए-आजा़दी के योद्धा सूफ़ी फ़कीर डंका शाह को खोज निकाला है जिनकी कब्र उत्‍तर प्रदेश के शाहजहांपुर में है। डंका शाह अपनों के ही विश्‍वासघात के कारण 15 जून 1858 को शहीद हुए थे। संयोग है कि 157 वर्षों बाद उसी शाहजहांपुर में जून के ही महीने में एक पत्रकार को काले अंग्रेज़ों ने जलाकर मार दिया। जगेंद्र सिंह की ख़ता बस इतनी थी कि उसने अपनी ज़बान एक सत्‍ताधारी के खिलाफ खोली थी। उसने अपनी जान को ख़तरा भी बताया था, लेकिन अपनी बिरादरी ने ही गद्दारी कर दी। बेशर्मी की इंतिहा देखिए कि पत्रकारों ने जगेंद्र को पत्रकार मानने से ही इनकार कर दिया। 1857 की जंग की नाकामी का सबक शाह आलम कुछ यूं गिनाते हैं, ''आप बिकेंगे तो हर मोर्चे पर हारेंगे।'' 2015 के शाहजहांपुर पर भी यह सबक हूबहू लागू होता है। फि़लहाल पढि़ए डंका शाह के शहादत दिवस 15 जून पर यह विशेष प्रस्‍तुति - (मॉडरेटर) 


6/14/2015

बीएचयू ब्रांड साम्‍प्रदायिक सौहार्द: स्‍वामी-खलकामी के बीच लटका जमात-ए-इस्‍लामी हिंद


 परसों मेल पर एक न्‍योता आया। भेजने वाले का नाम है तौसीफ़ मादिकेरी और परिचय है 'राष्‍ट्रीय सचिव', स्‍टू‍डेंट्स इस्‍लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया (एसआइओ)। कार्यक्रम बनारस हिंदू युनिवर्सिटी में दो दिन का एक अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन (15-16 जून, 2015) है जिसका विषय है ''साम्‍प्रदायिक सौहार्द और राष्‍ट्र निर्माण'' पर अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन। आमंत्रण का कार्ड देखकर कुछ आशंका हुई क्‍योंकि उद्घाटन करने वाले व्‍यक्ति का नाम है राम शंकर कथेरिया, जो केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्‍यमंत्री है और समापन वक्‍तव्‍य देने वाले का नाम है इंद्रेश कुमार, जिसके परिचय में लिखा है ''सोशल एक्टिविस्‍ट, दिल्‍ली''। जिस मेल से न्‍योता आया था, मैंने उस पर एक जिज्ञासा लिखकर भेजी कि इंद्रेश कुमार नाम का यह 'सोशल एक्टिविस्‍ट' कौन है, कृपया इसकी जानकारी दें। जवाब अब तक नहीं आया है। इस दौरान कार्यक्रम के सह-संयोजक बीएचयू के राजनीतिशास्‍त्र विभाग के अध्‍यक्ष कौशल किशोर मिश्रा ने twocircles.net के पत्रकार सिद्धांत मोहन को फोन पर पुष्टि की है कि आमंत्रण कार्ड पर मौजूद इंद्रेश कुमार राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रचारक ही हैं, और कोई नहीं। आमंत्रण भेजने वाले एसआइओ के राष्‍ट्रीय सचिव तौसीफ का कहना है कि ये बात गलत है और सिर्फ प्रचार के उद्देश्‍य से फैलायी जा रही है। तौसीफ कहते हैं, ''आप खुद आकर देखिए। ये इंद्रेश कुमार नीदरलैंड के रिटायर्ड प्रोफेसर हैं जो दिल्‍ली में रहते हैं।'' पत्रकार महताब आलम ने इस दौरान अपनी फेसबुक पोस्‍ट में प्रो. के.के. मिश्रा के हवाले से पुष्टि की है कि कार्यक्रम में आरएसएस के इंद्रेश कुमार ही आ रहे हैं। 

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