8/31/2015

बनारस में हो तो अपना लक पहन के चलो!



अभिषेक श्रीवास्‍तव 


बनारस के अख़बारों में मरने-मारने की ख़बरें हाल तक काफी कम होती थीं। एक समय था जब कुछ लोग ऐसा दावा भी करते थे कि बनारस में बलात्‍कार नहीं होते और लोग खुदकुशी नहीं करते। मारपीट और गुंडई की बात अलग है लेकिन लोगों के बीच दैनिक जीवन में असहिष्‍णुता तो नहीं ही होती थी। आज बनारस के अखबार उठाकर देखिए। दो बातें दिखाई देंगी। पहला, स्‍थानीय संस्‍करणों के शुरुआती तीन-चार पन्‍ने रियल एस्‍टेट के विज्ञापनों से पटे पड़े हैं। दूसरा, भीतर के पन्‍नोंं पर हत्‍या, पीट कर मार डालने, खुदकुशी, फांसी लगाने जैसी खबरें बहुतायत में हैं। परसों कोई जाम में फंस कर मर गया। एक लड़की ने मायके में फांसी लगा ली। एक इंजीनियर ने बेटी का गला घोंट दिया और खुद  को मार लिया। एक छेड़छाड़ के आरोपी युवक को लोगों ने पीट-पीट कर मार दिया। यह बदलते हुए बनारस का एक नया चेहरा है। 

गड्ढे से निकलने को बेचैन है बनारस 

8/30/2015

बनारस सुरक्षा बंधन मना रहा है!


अभिषेक श्रीवास्‍तव 



पूर्णिमा बीत गई। सावन ढलने वाला है। देश रक्षाबंधन मना चुका। बनारस सुरक्षा बंधन मना रहा है। देखकर दिमाग चकरा गया जब हमने शुक्रवार की सुबह करीब दो दर्जन औरतों की भीड़ को नई सड़क के एक कोने में एक स्‍टॉल के पास जमा पाया। स्‍टॉल पर भाजपा का गमछा लपेटे एक दबंग टाइप अधेड़ शख्‍स फेरीवाले की तरह आवाज़ लगा रहा था, ''आज आखिरी दिन है।'' वह वहां खड़ी औरतों को प्रधानमंत्री बीमा योजना का फॉर्म बांट रहा था। मेज़ पर ढेर सारे आधार कार्ड पड़े थे, कुछ औरतें फॉर्म भरने में व्‍यस्‍त थीं तो कुछ उसे लेकर घर जा रही थीं। मैंने फॉर्म मांगा तो वहां बैठे व्‍यक्ति ने मना कर दिया और कुछ संदेह से मुझे देखने लगा। आसपास के स्‍थानीय पुरुष बेशक इस सुरक्षा का असल मतलब समझ रहे हों, लेकिन उन्‍हें पान चबाने और गाली देने से फुरसत नहीं है कि वे ऐसे मामलों में- हमारी भाषा में- इन्‍टरवीन कर सकें। 


8/28/2015

काशी में बैठकर झूठ कौन बोलता है!




बनारस और दिल्‍ली के बीच कई संयोग हैं। पहले भी थे, अब भी हैं, आगे भी घटते रहेंगे। कुछ संयोग हालांकि ऐसे होते हैं जिनकी ओर हमारा ध्‍यान सहज नहीं जाता। मसलन, कल शाम जब बनारस के अपने अख़बार गांडीव पर नज़र पड़ी तो मेरा दिमाग कौंधा। दिल्‍ली में राजेंद्र यादव के जाने के बाद रचना यादव हंस चला रही हैं। इधर, बनारस में राजीव अरोड़ा के जाने के बाद रचना अरोड़ा गांडीव निकाल रही हैं। मैंने पहली बार उनका संपादकीय कल देखा, ''...और थम गई काशी''। ज़ाहिर है, जाम की जो ख़बर ए पार से ओ पार तक दावानल की तरह फैली हुई थी, वह गांडीव से कैसे छूट जाती। तो इस ऐतिहासिक जाम का विवरण देने के बाद रचना अरोड़ा संपादकीय के अंत में जब 'हर हर महादेव' लिखा, तो एक बात समझ में आई कि मामला कुल मिलाकर अंत में महादेव के भरोसे ही जा टिकना है, चाहे इस क्षेत्र का सांसद, विधायक, प्रतिनिधि कोई भी हो। 

8/27/2015

क्‍योटो के ए पार, क्‍योटो के ओ पार...



अभिषेक श्रीवास्‍तव 


आज पानी गिर रहा है... 

हफ्ते भर बाद बनारस में कल बारिश हुई। बारिश होते ही दो खबरें काफी तेजी से फैलीं। पहली, कि नई सड़क पर कमर भर पानी लग गया है। दूसरी, कि पूरा शहर जाम है। खबर इतनी तेज फैली कि कचहरी पर तिपहिया ऑटो की कतारें लग गईं। कोई भी ऑटो शहर में जाने को तैयार नहीं था। हमेशा की तरह शहर दो हिस्‍सों में बंट गया था। कचहरी पर बस एक ही आवाज सुनाई दे रही थी- आइए, ए पार। ओ पार बोलने वाला कोई नहीं था। यह बनारस का पुराना मर्ज है।

8/26/2015

बनारस-क्‍योटो संधि का एक साल: किस्‍तों में ज़मीनी पड़ताल



अभिषेक श्रीवास्‍तव 





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्‍त 2014 को जापान में एक सौदा किया था। सौदा था बनारस को क्‍योटो बनाने का, या कहें क्‍योटो जैसा बनाने का। एक बरस बीत रहा है और डा. मोदी के एक्‍स-रे से जितना बनारस बाहर हो चुका है, उतना ही जापान। फिलहाल उन्‍हें सिर्फ पाकिस्‍तान दिखाई दे रहा है। उनकी एक्‍स-रे मशीन साल भर में बिगड़  गई है। बनारस के लोग बेचैन हैं कि राडार इधर की ओर घूमे।

8/20/2015

हेम मिश्रा: चालीस मीटर के 'संपूर्ण संसार' में दो साल


अंजनी कुमार 


हेम मिश्रा : दो साल से नागपुर की अंडा सेल में कैद 

8/15/2015

निराशावाद छोडि़ए, फाफड़ा खाइए और शांत रहिए

(अखिलेश कुमार संघर्षरत होनहार युवा पत्रकार हैं। कल ही इनके मन में कुछ खयाल स्‍वतंत्रता दिवस को लेकर आए। रात बीती, तो सुबह लाल किले से भी कुछ खयाल छोड़े गए। इन दोनों खयालों को मिलाकर और थोड़ा संपादन व थोड़ा वक्‍त लगाकर इस गणतंत्र की आज़ादी की एक तस्‍वीर उभरी है- मॉडरेटर)   

अखिलेश कुमार 

8/02/2015

नेपाल का संविधान और 40 सूत्रीय मांग



विष्‍णु शर्मा 


4 फरवरी 1996 को तत्कालीन संयुक्त जनमोर्चा (नेपाल) की ओर से डाॅ बाबुराम भट्टराई ने प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा को 40 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। संयुक्त मोर्चा ने यह भी घोषणा की कि इन मांगों पर यदि सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो वे राज्यसत्ता के विरोध में सशक्त संघर्ष के रास्ते में जाने के लिए बाध्य होंगे14 फरवरी 1996 को नेपाल की कम्युनिस्‍ट पार्टी (माओवादी) ने नेपाल की राज्यसत्ता के विरुद्ध जनयुद्ध की घोषणा कर दी।


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