10/24/2015

मेरे लेखकों! किसका इंतज़ार है और कब तक?

पाणिनि आनंद 
करीब सात हफ्ते पहले हिंदी के प्रतिष्ठित लेखक उदय प्रकाश ने जब अपना साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटाया था तब उनसे सबसे पहला विस्‍तृत साक्षात्‍कार कैच न्‍यूज़ के वरिष्‍ठ सहायक संपादक पाणिनि आनंद ने  लिया था। यह साक्षात्‍कार 6 सितंबर को प्रकाशित हुआ था लेकिन कई तथ्‍य इसमें संपादित कर दिए गए थे। उस वक्‍त तक न तो यह अंदाज़ा था कि पुरस्‍कार वापसी की यह इकलौती कार्रवाई एक चिंगारी का काम करेगी, न ही यह इलहाम था कि साहित्‍य अकादमी को अपने कदम पीछे खींचने पड़ेंगे और लेखकों की हत्‍याओं की औपचारिक निंदा करने को मजबूर होना पड़ेगा। आज जब करीब चार दर्जन लेखकों की पुरस्‍कार वापसी के बाद सरकार की इस ''स्‍वायत्‍त'' संस्‍था को झुकना पड़ा है और आंदोलन अपने पहले चरण को तकरीबन पूरा कर चुका है, तो लेखकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब आगे क्‍या होगा? सरकार विचलित है तो लेखक भी चिंतित हैं। इस समूचे अध्‍याय पर पाणिनि आनंद ने इस बार ख़बर से आगे बढ़कर एक प्रेरणादायी और आवाहनकारी लेख लिख डाला है जो उदय प्रकाश के साक्षात्‍कार के छूट गए अंशों को मिलाकर काफी तथ्‍यात्‍मक और प्रेरणादायी बन पड़ा है। यह लेख बीते डेढ़ महीनों में घटी घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए भविष्‍य की भी पड़ताल करता है। (मॉडरेटर)  



ग्राफिक्‍स: साभार कैच न्‍यूज़ 



10/23/2015

हरीश रावत के जिंदल प्रेम में एक्‍सपोज़ हुई भाजपा, पीसी तिवारी व अन्‍य हिरासत में


पुष्‍कर सिंह बिष्‍ट । अल्मोड़ा


रानीखेत के नैनीसार में जिंदल समूह को कौड़ियों के भाव ग्रामीणों की जमीन देने के विरोध में आए उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के पीसी तिवारी व उनके आठ सहयोगियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों खासकर महिलाओं को पुलिस दमन का शिकार होना पड़ा। इलाके को पुलिस छावनी बनाकर मुख्यमंत्री ने इस कथित अंतरराष्‍ट्रीय स्कूल का उद्घाटन आखिरकार कर ही डाला। गुरुवार की सुबह जब परिवर्तन पार्टी के सदस्‍यों का दल कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुआ तो कटारमल के पास पुलिस ने पीसी तिवारी, जीवन चंद्र, प्रेम आर्या, अनूप तिवारी, राजू गिरी आदि को हिरासत में ले लिया। देर शाम तक इन लोगों को नहीं छोड़ा गया था। 


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