12/30/2015

2015 से आगे की एक कविता


अभिषेक श्रीवास्‍तव 


12/21/2015

शिंज़ो आबे, मोदी और एशिया की बदलती राजनीति



कुमार सुंदरम 


दिसंबर में जापानी परधानमंत्री जैसे नरेंद्र मोदी के लिए सांता क्लॉज़ बन के आए थे. बुलेट ट्रेन, लड़ाकू नौसेनिक विमान, औद्योगिक गलियारे के लिए निवेश और भारत-जापान परमाणु समझौता. भारतीय मीडिया को ज़्यादा तरजीह देने लायक मामले बुलेट ट्रेन और बनारस में शिंजो आबे की गंगा आरती ही लगे, लेकिन इसी बीच परमाणु समझौते को भी मुकम्मल घोषित कर दिया गया. हिन्दुस्तान टाइम्स के विज्ञान व अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रभारी पत्रकार परमीत पाल चौधरी ने अपने सरकारी स्रोतों के हवाले से इस परमाणु डील को फाइनल करार दे दिया और यह भी खबर दी कि अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस अब रास्ता साफ़ होने के बाद 1000 मेगावाट क्षमता के 6 परमाणु बिजली कारखाने बेचने का मसौदा लेकर तैयार है.

12/20/2015

छत्‍तीसगढ़ में कैद बेगुनाह पत्रकारों के समर्थन में उतरे प्रतिष्ठित लेखक, बुद्धिजीवी और संगठन





नई दिल्‍ली, 20 दिसंबर : छत्‍तीसगढ़ की जेल में फर्जी मुकदों में बंद दो पत्रकारों संतोष यदव व सोमारू नाग की तत्‍काल रिहाई समेत कई अन्‍य मांगों को उठाने के लिए कल यानी 21 दिसंबर, 2015 को जगदलपुर में होने जा रहे पत्रकार महाआंदोलन को प्रतिष्ठित लेखकों, पत्रकारों, राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है।

12/10/2015

यादों के सहारे : मैं विद्रोही बोल रहा हूं!




महताब आलम 



आगे विद्रोही और पीछे महताब आलम 

दिल्ली के किसी नए लैंडलाइन/मोबाइल नंबर से मेरे मोबाइल पर घंटी बजती है तो दिल से निकलता है, लो आ गया फिर किसी लोन देने वाले/फ्लैट दिलाने वाले/गाड़ी बेचने वाले/बीमा एजेंसी वाले का फोन! मन होता है कि न उठाऊँ, और कई बार नहीं भी उठाता हूं, लेकिन फिर ये भी खयाल होता है क्या पता किसी परिचित का फोन हो। बैलेंस 'नहीं' होगा इसलिए ऑफिस के फोन से कर रहे हों या फिर किसी साथी के फोन से। और ऐसा हुआ भी है, कई बार। सो उठा लेता हूं अननेम्ड कॉल्स भी। क्या पता कोई ज़रूरी कॉल छूट जाये इन कमबख्तों के चक्कर में। ऐसे नम्बरों से आने वाले कॉल्स में इन कस्टमर केयर और कॉल सेंटर से आने वाले कॉल्स के बाद सबसे ज़यादह आता है एक अहम कॉलफोन उठाते ही एक चिर-परिचित आवाज़ उभरती है: "हेलो कामरेड महताब...!" मैं समझ जाता हूं, ये विद्रोहीजी बोल रहे हैं- उनके बोलने से पहले कि "मैं विद्रोही बोल रहा हूं"!


12/08/2015

भारत, जापान और परमाणु ऊर्जा का सच



कुमार सुंदरम 


जैतापुर या कूडनकुलम का आंदोलन हो या भारत-जापान परमाणु समझौते के खिलाफ इस हफ्ते होने वाला देशव्यापी आंदोलन, इन सभी मौकों पर देश के शहरी मध्यवर्ग और उसके साथ-साथ मीडिया से लेकर अदालतों तक सबका रुख यही रहता है कि विस्थापन, पर्यावरण और सुरक्षा के सवाल तो अपनी जगह ठीक हैं, लेकिन भारत को बिजली तो चाहिए।विकास तो चाहिए। देश के लिए विकास, विकास के लिए बेतहाशा बिजली और बिजली के लिए अणु-बिजलीघर, इन तीनों कनेक्शनों को बिना किसी बहस के सिद्ध मान लिया गया है और आप इस तर्क की किसी भी गाँठ को दूसरी सूचनाओं-परिप्रेक्ष्यों से खोलने की कोशिश करते हैं तो राष्ट्रद्रोही करार दे दिए जाते हैं.

12/07/2015

आखिर क्यों हो रहा है देश भर में भारत-जापान परमाणु समझौते का विरोध?



कुमार सुंदरम 

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे अगले हफ्ते तीन दिनों की यात्रा पर भारत आएँगे। इस दौरान उनके बनारस दौरे के तामझाम के अलावा जो मुख्य बात होनी है वह है भारत और जापान के बीच परमाणु समझौता। यह परमाणु करार पिछले कई सालों से विचाराधीन है और इसे लेकर भारत और जापान दोनों देशों में विरोध होता रहा है. इस बार शायद मोदी और आबे दोनों इस समझौते के लिए आख़िरी ज़ोर लगाएं क्योंकि दोनों की राजनीतिक पूंजी अब ढलान पर है.

12/04/2015

भारत-जापान न्‍यूक्लियर डील के विरोध की अपील




भारत-जापान परमाणु समझौता उस बड़ी डील की आख़िरी बची हुई कड़ी है जिसके इर्द-गिर्द देश की राजनीति पिछले दस साल से घूम रही है. बाकी सारे समझौते संपन्न होने, किसानों से ज़बरदस्ती ज़मीन छीने जाने और आयातित अणु-बिजलीघरों के लिए पर्यावरण, सुरक्षा और पारदर्शिता के कायदे ताक पर रख दिए जाने और परमाणु दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे का भार विदेशी कंपनियों पर न डालने के निर्लज्ज वादों के बावजूद अमेरिका और फ्रांस के परमाणु प्रोजेक्ट अभी तक अटके पड़े हैं. उनके डिज़ाइनों में कुछ ऐसे पुर्ज़ों की ज़रुरत होती है जो सिर्फ जापान बनाता है. फुकुशिमा के बाद पूरी दुनिया में परमाणु लॉबी का कारोबार आख़िरी सांस ले रहा है और उनको भारत में अपना बाज़ार बढ़ाने के लिए जापान-भारत परमाणु समझौते की सख्त दरकार है. परमाणु-विरोधी आन्दोलनों और जैतापुर, मीठीविर्दी, कोवाडा तथा कूडनकुलम के किसानों  यह आख़िरी मौक़ा है अपना विनाश रोकने का.

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