2/23/2016

Statement by Citizens Committee for the Defense of Democracy



The Citizens Committee for the Defense of Democracy strongly condemns the clampdown in Jawaharlal Nehru University. We deplore the targeting of students and teachers and condemn the culture of authoritarian menace that the Central Government has unleashed. We strongly believe that dissent is not sedition and invoking sedition laws against students, ordering the police to enter the campus and unlawfully arresting a student leader, issuing warrants against many others on charges of inciting violence, attacking students, teachers and arrested student in the court premises, are serious assault on the fundamental rights of the citizens of this country. The right to dissent is fundamental to maintaining democracy and the recent developments have shaken the foundations of democracy. We condemn the indiscriminate use of the colonial law of sedition on dissenting voices.


2/22/2016

दहिने बाएं दहिने बाएं... थम!


व्यालोक 
व्यालोक पेशे से पत्रकार हैं। विचारधारा से दक्षिणपंथी। जेएनयू में करीब पंद्रह साल पहले वे एबीवीपी के नेता रहे जिन्‍होंने परिसर में अशोक सिंघल का यज्ञ करवाकर लोकप्रियता हासिल कर ली थी। कालांतर में परिषद से इनका मोहभंग हो गया। समय के साथ पत्रकारिता से भी इनका मोह जाता रहा। फिलहाल अपने गृहजिले दरभंगा में रहकर कुछ सामाजिक काम और बागवानी आदि करते हैं। डेढ़ साल पहले दक्षिणपंथी सरकार केंद्र में आने के बाद वे दोबारा लेखकीय रूप से सक्रिय हुए हैं, लेकिन जेएनयू से जुड़े हालिया विवाद पर इनका पक्ष मारकाटवादी संघियों से अलहदा है। ठंडे दिमाग से इन्‍होंने कुछ बातें लिख कर भेजी हैं। आप इनसे सहमत हों या नहीं, लेकिन इसे पढ़ा जाना चाहिए - मॉडरेटर  



2/12/2016

इस मौत में झांकने के लिए एक दरवाज़ा खुला है...


अभिषेक श्रीवास्‍तव 


अतुल सक्‍सेना 

कल देर रात लुधियाना से लौटा। जाना बदा था नव करन की मौत का जायज़ा लेने, ले‍किन जाने का सबब बनी परसों शाम हुई एक और मौत- दैनिक जागरण के कर्मचारी अतुल सक्‍सेना की मौत। पुलिस रिकॉर्ड में यह खुदकुशी दर्ज है, नवकरन की ही तरह। रोहित वेमुला की राष्‍ट्रीय खुदकुशी के बाद इस मामूली स्‍थानीय मौत की चर्चा कोई नहीं करने वाला, सिवाय उनके जो अतुल को जानते थे या जो उनकी मौत के पीछे की वजह को समझते हैं। मेरे पास इस पर लिखने को एक छोटे उपन्‍यास जितनी सामग्री है, लेकिन लिखूंगा उतना ही जितना तात्‍कालिक और सार्वजनिक रूप से ज़रूरी है।

2/03/2016

एक लेखक को मारने के हज़ार तरीके

पंकज मिश्रा 

पंकज मिश्रा अंग्रेज़ी के प्रतिष्ठित लेखक हैं और राजनीतिक व सामाजिक विषयों पर टिप्‍पणी लिखते हैं। उनकी यह टिप्‍पणी 2 फरवरी, 2016 को दि गार्डियन में प्रकाशित हुई है। हम इसे वहीं से साभार ले रहे हैं। सारी तस्‍वीरें भी वहीं से साभार हैं। अनुवाद अभिषेक श्रीवास्‍तव का है। 





अरुंधति रॉय के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। ज़ाहिर है, मोदी की सरकार ने कला और विचार के खिलाफ़ इस अपराध के मौका-ए-वारदात पर अपनी उंगलियों के कोई निशान नहीं छोड़े हैं।


2/01/2016

पी.सी. तिवारी का हरीश रावत को जेल से खुला पत्र






सेवा में, 
माननीय मुख्यमंत्री हरीश रावत जी 
उत्तराखण्ड सरकार,
देहरादून

माननीय मुख्यमंत्री जी, 

एक स्थानीय चैनल ईटीवी पर कल रात व आज सुबह पुनः नानीसार पर आपका विस्तृत पक्ष सुनने का मौका मिला। आपकी इस मामले में चुप्पी टूटने ये यह साबित हुआ कि उत्तराखण्ड में संघर्षरत जनता की आवाज आपकी पार्टी की सियासी सेहत को नुकसान पहुंचाने लगी है। 


रोहित की जि़ंदगीः परतदार दर्द की उलझी हुई दास्ताँ





सुदीप्तो मंडल
हिंदुस्तान टाइम्स, गुंटूर/हैदराबाद. 27 जनवरी, 2016
अनुवादः रश्मि शर्मा


रोहित वेमुला की कहानी उसके जन्म से 18 वर्ष पूर्व सन् 1971 की गर्मियों में गुन्टूर शहर से प्रारंभ होती है। यही वह वर्ष था जब रोहित की दत्तक नानी अंजनी देवी ने उन घटनाक्रमों को प्रारंभ किया, जिन्हें बाद में इस शोधार्थी ने अपने आत्महत्या नोट में गूढ़ रूप से ‘‘मेरे जीवन की घातक दुर्घटना कहा है।’’


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